तांस्तु सर्वान्प्रतिव्यूह्य युद्धे राजा प्रवासितः ।
स च शैलवरे रम्ये बभूवाभिरतो मुनिः ।
द्वे चास्य भार्ये गर्भिण्यौ बभूवतुरिति श्रुतिः ॥
तांस्तु सर्वान्प्रतिव्यूह्य युद्धे राजा प्रवासितः ।
स च शैलवरे रम्ये बभूवाभिरतो मुनिः ।
द्वे चास्य भार्ये गर्भिण्यौ बभूवतुरिति श्रुतिः ॥
अन्वयः
राजा the king, युद्धे in battle, तान् सर्वान् all of them, प्रतिव्यूह्य having engaged, प्रवासितः driven into exile, सः he, रम्ये in a delightful, शैलवरे on a tall mountain, अभिरतः contented, मुनिः sage, बभूव became.Summary
Although king Asita engaged all of them in a battle, he was (defeated and) driven into exile. He retired to a delightful, tall mountain and lived a life of contentment of a sage.पदच्छेदः
| तांस् | तद् (२.३) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सर्वान् | सर्व (२.३) |
| प्रतिव्यूह्य | प्रतिव्यूह्य (√प्रतिवि-ऊह् + ल्यप्) |
| युद्धे | युद्ध (७.१) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| प्रवासितः | प्रवासित (√प्र-वासय् + क्त, १.१) |
| स | तद् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| शैलवरे | शैलवर (७.१) |
| रम्ये | रम्य (७.१) |
| बभूवाभिरतो | बभूव (√भू लिट् प्र.पु. एक.)–अभिरत (√अभि-रम् + क्त, १.१) |
| मुनिः | मुनि (१.१) |
| द्वे | द्वि (१.२) |
| चास्य | च (अव्ययः)–इदम् (६.१) |
| भार्ये | भार्या (१.२) |
| गर्भिण्यौ | गर्भिन् (१.२) |
| बभूवतुर् | बभूवतुः (√भू लिट् प्र.पु. द्वि.) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| श्रुतिः | श्रुति (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तां | स्तु | स | र्वा | न्प्र | ति | व्यू | ह्य | यु | द्धे | रा | जा |
| प्र | वा | सि | तः | स | च | शै | ल | व | रे | र | म्ये |
| ब | भू | वा | भि | र | तो | मु | निः | द्वे | चा | स्य | भा |
| र्ये | ग | र्भि | ण्यौ | ब | भू | व | तु | रि | ति | श्रु | तिः |