इक्ष्वाकूणां हि सर्वेषां राजा भवति पूर्वजः ।
पूर्वजे नावरः पुत्रो ज्येष्ठो राज्येऽभिषिच्यते ॥
इक्ष्वाकूणां हि सर्वेषां राजा भवति पूर्वजः ।
पूर्वजे नावरः पुत्रो ज्येष्ठो राज्येऽभिषिच्यते ॥
पदच्छेदः
| इक्ष्वाकूणां | इक्ष्वाकु (६.३) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| सर्वेषां | सर्व (६.३) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| भवति | भवति (√भू लट् प्र.पु. एक.) |
| पूर्वजः | पूर्वज (१.१) |
| पूर्वजेनावरः | पूर्वज (३.१)–अवर (१.१) |
| पुत्रो | पुत्र (१.१) |
| ज्येष्ठो | ज्येष्ठ (१.१) |
| राज्ये | राज्य (७.१) |
| ऽभिषिच्यते | अभिषिच्यते (√अभि-सिच् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | क्ष्वा | कू | णां | हि | स | र्वे | षां |
| रा | जा | भ | व | ति | पू | र्व | जः |
| पू | र्व | जे | ना | व | रः | पु | त्रो |
| ज्ये | ष्ठो | रा | ज्ये | ऽभि | षि | च्य | ते |