अन्वयः
परमोदारः a man of great generosity, भरतः Bharata, रामेण by Rama, एवम् in this way, उक्तः having been addressed, परमदुर्मनाः with extremely distressed mind, प्रत्यनन्तरं who was nearby, सूतम् to the charioteer, उवाच said.
Summary
Having been addressed by Rama in this way, Bharata of great generosity, in extreme distress, addressing the charioteer who was standing nearby said:
पदच्छेदः
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| उक्तस् | उक्त (√वच् + क्त, १.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| रामेण | राम (३.१) |
| भरतः | भरत (१.१) |
| प्रत्यनन्तरम् | प्रत्यनन्तर (२.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| परमोदारः | परम–उदार (१.१) |
| सूतं | सूत (२.१) |
| परमदुर्मनाः | परम–दुर्मनस् (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | व | मु | क्त | स्तु | रा | मे | ण |
| भ | र | तः | प्र | त्य | न | न्त | रम् |
| उ | वा | च | प | र | मो | दा | रः |
| सू | तं | प | र | म | दु | र्म | नाः |