अन्वयः
धर्मात्मा righteous, रामः Rama, तस्य his, भ्रातुः brother's, तथ्येन genuine, वाक्येन with words, विस्मितः was astonished, पौरजानपदम् inhabiting the towns and villages, जनम् people, सम्प्रेक्ष seeing, उवाच said.
Summary
On hearing the genuine sentiments of his brother, righteous Rama was astonished. He said to the inhabitants from towns and villages:
पदच्छेदः
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| तथ्येन | तथ्य (३.१) |
| भ्रातुर् | भ्रातृ (६.१) |
| वाक्येन | वाक्य (३.१) |
| विस्मितः | विस्मित (√वि-स्मि + क्त, १.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| रामः | राम (१.१) |
| सम्प्रेक्ष्य | सम्प्रेक्ष्य (√सम्प्र-ईक्ष् + ल्यप्) |
| पौरजानपदं | पौर–जानपद (२.१) |
| जनम् | जन (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ध | र्मा | त्मा | त | स्य | त | थ्ये | न |
| भ्रा | तु | र्वा | क्ये | न | वि | स्मि | तः |
| उ | वा | च | रा | मः | सं | प्रे | क्ष्य |
| पौ | र | जा | न | प | दं | ज | नम् |