अन्वयः
सत्यधर्मपराक्रम one whose strength comes from truth and righteousness, राघव Rama, त्वम् you, याचमानस्य of the supplicant, भरतस्य Bharata's, वचः words, कुर्वन् by following, आत्मानम् call of your soul, नातिवर्तेः will not ignore.
Summary
O scion of the Raghus whose strength springs from truth and righteousness, if you accede to the prayers of Bharata, you will not ignore the call of your soul.
पदच्छेदः
| भरतस्य | भरत (६.१) |
| वचः | वचस् (२.१) |
| कुर्वन् | कुर्वत् (√कृ + शतृ, १.१) |
| याचमानस्य | याचमान (√याच् + शानच्, ६.१) |
| राघव | राघव (८.१) |
| आत्मानं | आत्मन् (२.१) |
| नातिवर्तेस् | न (अव्ययः)–अतिवर्तेः (√अति-वृत् विधिलिङ् म.पु. ) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| सत्यधर्मपराक्रम | सत्य–धर्म–पराक्रम (८.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| भ | र | त | स्य | व | चः | कु | र्व |
| न्या | च | मा | न | स्य | रा | घ | व |
| आ | त्मा | नं | ना | ति | व | र्ते | स्त्वं |
| स | त्य | ध | र्म | प | रा | क्र | म |