अन्वयः
समवेताः those who had assembled, महर्षयः the great sages, अप्रतिमतेजोभ्यां of both men of unparalleled brilliance, भ्रातृभ्याम् of brothers (Rama and Bharata), तम् that, रोमहर्षणम् thrilled, सङ्गमम् their meeting, प्रेक्ष्य witnessing, विस्मिताः were amazed.
Summary
The great sages assembled there were amazed at witnessing the meeting of the two brothers (Rama and Bharata) of umparalleled briliance.
पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| अप्रतिमतेजोभ्यां | अप्रतिम–तेजस् (३.२) |
| भ्रातृभ्यां | भ्रातृ (३.२) |
| रोमहर्षणम् | रोमन्–हर्षण (२.१) |
| विस्मिताः | विस्मित (√वि-स्मि + क्त, १.३) |
| संगमं | संगम (२.१) |
| प्रेक्ष्य | प्रेक्ष्य (√प्र-ईक्ष् + ल्यप्) |
| समवेता | समवेत (√समव-इ + क्त, १.३) |
| महर्षयः | महत्–ऋषि (१.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | म | प्र | ति | म | ते | जो | भ्यां |
| भ्रा | तृ | भ्यां | रो | म | ह | र्ष | णम् |
| वि | स्मि | ताः | सं | ग | मं | प्रे | क्ष्य |
| स | म | वे | ता | म | ह | र्ष | यः |