अन्वयः
भरतः Bharata, तदा then, इति thus, उक्त्वा having said, भ्रातुः brother's, पादयोः at the feet, न्यपतत् fell, प्रियंवदः one who speaks sweetly, Bharata, रामम् एव Rama alone, भृशम् profusely, सम्प्रार्थयामास entreated him.
Summary
Having said this, Bharata, fell at the feet of his brother, and speaking sweetly, he profusely entreated Rama.
पदच्छेदः
| इत्य् | इति (अव्ययः) |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| न्यपतद् | न्यपतत् (√नि-पत् लङ् प्र.पु. एक.) |
| भ्रातुः | भ्रातृ (६.१) |
| पादयोर् | पाद (७.२) |
| भरतस् | भरत (१.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| भृशं | भृशम् (अव्ययः) |
| सम्प्रार्थयामास | सम्प्रार्थयामास (√सम्प्र-अर्थय् प्र.पु. एक.) |
| रामम् | राम (२.१) |
| एवं | एवम् (अव्ययः) |
| प्रियंवदः | प्रियंवद (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | त्यु | क्त्वा | न्य | प | त | द्भ्रा | तुः |
| पा | द | यो | र्भ | र | त | स्त | दा |
| भृ | शं | सं | प्रा | र्थ | या | मा | स |
| रा | म | मे | वं | प्रि | यं | व | दः |