अन्वयः
भरतः Bharata, एवम् in this way, ब्रुवाणम् speaking, तेजसा in brilliance, आदित्यसङ्काशम् resembling the Sun, प्रतिपच्चन्द्रदर्शनम् appearance like the new Moon, कौसल्यासुतम् to the son of Kausalya, अब्रवीत् said.
Summary
On hearing this, Bharata replied to the son of Kausalya who looked like the Sun or the new Moon in brilliance:
पदच्छेदः
| एवं | एवम् (अव्ययः) |
| ब्रुवाणं | ब्रुवाण (√ब्रू + शानच्, २.१) |
| भरतः | भरत (१.१) |
| कौसल्यासुतम् | कौसल्या–सुत (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| तेजसादित्यसंकाशं | तेजस् (३.१)–आदित्य–संकाश (२.१) |
| प्रतिपच्चन्द्रदर्शनम् | प्रतिपद्–चन्द्र–दर्शन (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | वं | ब्रु | वा | णं | भ | र | तः |
| कौ | स | ल्या | सु | त | म | ब्र | वीत् |
| ते | ज | सा | दि | त्य | सं | का | शं |
| प्र | ति | प | च्च | न्द्र | द | र्श | नम् |