अन्वयः
तदा then, भरतः Bharata, रम्याणि beautiful, विविधानि various, धातुसहस्राणि a thousand varieties of minerals, पश्यन् beholding, ससैन्यः with army, तस्य that mountain's, पार्श्वे alongside, प्रययौ went.
Summary
Beholding a thousand varieties of beautiful minerals, Bharata with his army proceeded alongside the mountain.
पदच्छेदः
| पश्यन् | पश्यत् (√दृश् + शतृ, १.१) |
| धातुसहस्राणि | धातु–सहस्र (२.३) |
| रम्याणि | रम्य (२.३) |
| विविधानि | विविध (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| प्रययौ | प्रययौ (√प्र-या लिट् प्र.पु. एक.) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| पार्श्वेन | पार्श्व (३.१) |
| ससैन्यो | स (अव्ययः)–सैन्य (१.१) |
| भरतस् | भरत (१.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प | श्य | न्धा | तु | स | ह | स्रा | णि |
| र | म्या | णि | वि | वि | धा | नि | च |
| प्र | य | यौ | त | स्य | पा | र्श्वे | न |
| स | सै | न्यो | भ | र | त | स्त | दा |