अन्वयः
तदा then, भरतः Bharata, चित्रकूटस्य of Chitrakuta, अदूरात् not far from there, यत्र where, मुनिः sage, सः भरद्वाजः that Bharadwaja, कृतालयः made his residence, आश्रमम् hermitage, ददर्श beheld.
Summary
Not far from Chitrakuta mountain, Bharata beheld a hermitage where sage Bharadwaja resided.
पदच्छेदः
| अदूराच् | अदूर (५.१) |
| चित्रकूटस्य | चित्रकूट (६.१) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| भरतस् | भरत (१.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| आश्रमं | आश्रम (२.१) |
| यत्र | यत्र (अव्ययः) |
| स | तद् (१.१) |
| मुनिर् | मुनि (१.१) |
| भरद्वाजः | भरद्वाज (१.१) |
| कृतालयः | कृत (√कृ + क्त)–आलय (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | दू | रा | च्चि | त्र | कू | ट | स्य |
| द | द | र्श | भ | र | त | स्त | दा |
| आ | श्र | मं | य | त्र | स | मु | नि |
| र्भ | र | द्वा | जः | कृ | ता | ल | यः |