अन्वयः
तदा then, बुद्धिमान् sagacious, सः भरतः that Bharata, भरद्वाजस्य Bharadwaja's, तम् आश्रमम् that hermitage, आगम्य having reached, रथात् from the chariot, अवितीर्य alighting, पादौ at his feet, ववन्दे prostrated.
Summary
On approaching the hermitage of sage Bharadwaja, Bharata alighted from the chariot, and prostrated at his feet.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तम् | तद् (२.१) |
| आश्रमम् | आश्रम (२.१) |
| आगम्य | आगम्य (√आ-गम् + ल्यप्) |
| भरद्वाजस्य | भरद्वाज (६.१) |
| बुद्धिमान् | बुद्धिमत् (१.१) |
| अवतीर्य | अवतीर्य (√अव-तृ + ल्यप्) |
| रथात् | रथ (५.१) |
| पादौ | पाद (२.२) |
| ववन्दे | ववन्दे (√वन्द् लिट् प्र.पु. एक.) |
| कुलनन्दनः | कुल–नन्दन (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | त | मा | श्र | म | मा | ग | म्य |
| भ | र | द्वा | ज | स्य | बु | द्धि | मान् |
| अ | व | ती | र्य | र | था | त्पा | दौ |
| व | व | न्दे | कु | ल | न | न्द | नः |