अन्वयः
पुण्यक्षयात् due to exhaustion of merit, स्थानात् from its place, सहसा suddenly, महीम् the earth, गताम् reached, संवृतद्युतिविस्ताराम् with its extensive lustre dimmed, दिवः from the earth, च्युताम् fallen, तारामिव like a star.
पदच्छेदः
| सहसा | सहसा (अव्ययः) |
| चलितां | चलित (√चल् + क्त, २.१) |
| स्थानान् | स्थान (५.१) |
| महीं | मही (२.१) |
| पुण्यक्षयाद् | पुण्य–क्षय (५.१) |
| गताम् | गत (√गम् + क्त, २.१) |
| संहृतद्युतिविस्तारां | संहृत (√सम्-हृ + क्त)–द्युति–विस्तार (२.१) |
| ताराम् | तारा (२.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| दिवश् | दिव् (५.१) |
| च्युताम् | च्युत (√च्यु + क्त, २.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | ह | सा | च | लि | तां | स्था | ना |
| न्म | हीं | पु | ण्य | क्ष | या | द्ग | ताम् |
| सं | हृ | त | द्यु | ति | वि | स्ता | रां |
| ता | रा | मि | व | दि | व | श्च्यु | ताम् |