अन्वयः
सम्मूढनिगमाम् dazed merchants, स्तब्धाम् stilled, संक्षिप्तविपणापणाम् with markets and shops closed, अम्बुधरैः with clouds, वृताम् covered, प्रच्छन्नशशिनक्षत्राम् obscuring the moon and stars, द्यामिव like the sky.
Summary
Ayodhya with its markets and shops closed, and its merchants in a daze looked like the sky covered with clouds obscuring the Moon and stars.
पदच्छेदः
| संमूढनिगमां | संमूढ (√सम्-मुह् + क्त)–निगम (२.१) |
| सर्वां | सर्व (२.१) |
| संक्षिप्तविपणापणाम् | संक्षिप्त (√सम्-क्षिप् + क्त)–विपण–आपण (२.१) |
| प्रच्छन्नशशिनक्षत्रां | प्रच्छन्न (√प्र-छद् + क्त)–शशिन्–नक्षत्र (२.१) |
| द्याम् | दिव् (२.१) |
| इवाम्बुधरैर् | इव (अव्ययः)–अम्बुधर (३.३) |
| वृताम् | वृत (√वृ + क्त, २.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| सं | मू | ढ | नि | ग | मां | स | र्वां |
| सं | क्षि | प्त | वि | प | णा | प | णाम् |
| प्र | च्छ | न्न | श | शि | न | क्ष | त्रां |
| द्या | मि | वा | म्बु | ध | रै | र्वृ | ताम् |