अन्वयः
श्रीमान् illustrious, दशरथात्मजः son of Dasaratha, भरतस्तु Bharata, रथस्थस्सन् seated in the chariot, रथश्रेष्ठम् the most excellent of chariots, वाहयन्तम् driving, सारथिम् to the charioteer, वाक्यम् these words, अब्रवीत् said.
Summary
Illustrious Bharata, son of Dasaratha, seated in his chariot, addressed the charioteer as he drove the most excellent of chariots saying:
पदच्छेदः
| भरतस् | भरत (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| रथस्थः | रथ–स्थ (१.१) |
| सञ् | सत् (√अस् + शतृ, १.१) |
| श्रीमान् | श्रीमत् (१.१) |
| दशरथात्मजः | दशरथ–आत्मज (१.१) |
| वाहयन्तं | वाहयत् (√वाहय् + शतृ, २.१) |
| रथश्रेष्ठं | रथ–श्रेष्ठ (२.१) |
| सारथिं | सारथि (२.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| भ | र | त | स्तु | र | थ | स्थः | स |
| ञ्श्री | मा | न्द | श | र | था | त्म | जः |
| वा | ह | य | न्तं | र | थ | श्रे | ष्ठं |
| सा | र | थिं | वा | क्य | म | ब्र | वीत् |