यानप्रवरघोषश्च स्निग्धश्च हयनिःस्वनः ।
प्रमत्तगजनादश्च महांश्च रथनिःस्वनः ।
नेदानीं श्रूयते पुर्यामस्यां रामे विवासिते ॥
यानप्रवरघोषश्च स्निग्धश्च हयनिःस्वनः ।
प्रमत्तगजनादश्च महांश्च रथनिःस्वनः ।
नेदानीं श्रूयते पुर्यामस्यां रामे विवासिते ॥
अन्वयः
रामे Rama, विवासिते having been exiled, इदानीम् now, अस्यां पुर्याम् in this city, यानप्रवरघोषश्च clatter of excellent carriages, स्निग्धः pleasant, हयनिस्वनश्च neighing of horses, प्रमत्तगजनादश्च trumpeting of elephants in rut, महान् great, रथनिस्वनः च rattle of chariots, न श्रूयते are not heard.Summary
After Rama's the exile the clatter of excellent carriages, the pleasing neighing of horses and trumpeting of elephants in rut and the rattle of chariots are no longer heard now.पदच्छेदः
| यानप्रवरघोषश् | यान–प्रवर–घोष (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| स्निग्धश् | स्निग्ध (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| हयनिःस्वनः | हय–निःस्वन (१.१) |
| प्रमत्तगजनादश् | प्रमत्त (√प्र-मद् + क्त)–गज–नाद (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| महांश् | महत् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| रथनिःस्वनः | रथ–निःस्वन (१.१) |
| नेदानीं | न (अव्ययः)–इदानीम् (अव्ययः) |
| श्रूयते | श्रूयते (√श्रु प्र.पु. एक.) |
| पुर्याम् | पुरी (७.१) |
| अस्यां | इदम् (७.१) |
| रामे | राम (७.१) |
| विवासिते | विवासित (√वि-वासय् + क्त, ७.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| या | न | प्र | व | र | घो | ष | श्च | स्नि | ग्ध | श्च | ह |
| य | निः | स्व | नः | प्र | म | त्त | ग | ज | ना | द | श्च |
| म | हां | श्च | र | थ | निः | स्व | नः | ने | दा | नीं | श्रू |
| य | ते | पु | र्या | म | स्यां | रा | मे | वि | वा | सि | ते |