अन्वयः
दृढव्रतः firm in his vows, सः भरतः that Bharata, ततः thereafter, मातृ़ mothers, अयोध्यायाम् in Ayodhya, निक्षिप्य having kept, शोकसन्तप्तः striken with grief, गुरून् to the elders, अथ thereafter, अब्रवीत् said.
Summary
After keeping his mothers in Ayodhya, the griefstricken Bharata who was firm in his vows, said to the elders:
पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| निक्षिप्य | निक्षिप्य (√नि-क्षिप् + ल्यप्) |
| स | तद् (१.१) |
| अयोध्यायां | अयोध्या (७.१) |
| दृढव्रतः | दृढ–व्रत (१.१) |
| भरतः | भरत (१.१) |
| शोकसंतप्तो | शोक–संतप्त (√सम्-तप् + क्त, १.१) |
| गुरून् | गुरु (२.३) |
| इदम् | इदम् (२.१) |
| अथाब्रवीत् | अथ (अव्ययः)–अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तो | नि | क्षि | प्य | मा | तॄः | स |
| अ | यो | ध्या | यां | दृ | ढ | व्र | तः |
| भ | र | तः | शो | क | सं | त | प्तो |
| गु | रू | नि | द | म | था | ब्र | वीत् |