अन्वयः
प्रभुः lord, वीरः warrior, सः भरतः that Bharata, तदा then, वल्कलजटाधारी wearing bark garments and matted locks, मुनिवेषधरः dressed as an ascetic, ससैन्यः with his army, नन्दिग्रामे in Nandigrama, अवसत् lived.
Summary
Bharata, the warrior and lord, wore bark garments and matted locks and lived the life of an ascetic in Nandigrama along with his army.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| वल्कलजटाधारी | वल्कल–जटा–धारिन् (१.१) |
| मुनिवेषधरः | मुनि–वेष–धर (१.१) |
| प्रभुः | प्रभु (१.१) |
| नन्दिग्रामे | नन्दिग्राम (७.१) |
| ऽवसद् | अवसत् (√वस् लङ् प्र.पु. एक.) |
| वीरः | वीर (१.१) |
| ससैन्यो | स (अव्ययः)–सैन्य (१.१) |
| भरतस् | भरत (१.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | व | ल्क | ल | ज | टा | धा | री |
| मु | नि | वे | ष | ध | रः | प्र | भुः |
| न | न्दि | ग्रा | मे | ऽव | स | द्वी | रः |
| स | सै | न्यो | भ | र | त | स्त | दा |