अन्वयः
भरतः O Bharata, त्वया by you, भ्रातृवात्सल्यात् out of devotion towards your brother, यत् वचनम् the words, उक्तम् uttered, सुभृशम् highly, श्लाघनीयं praiseworthy, तत् that one, तवैव you alone, अनुरूपम् befits.
Summary
O Bharata, the words you have uttered out of devotion to your brother which befit you alone are highly praiseworthy.
पदच्छेदः
| श्लाघनीयं | श्लाघनीय (√श्लाघ् + अनीयर्, १.१) |
| यशस्यं | यशस्य (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| कृतं | कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| कर्म | कर्मन् (१.१) |
| महत् | महत् (१.१) |
| त्वया | त्वद् (३.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | दृ | शं | श्ला | घ | नी | यं | च |
| य | दु | क्तं | भ | र | त | त्व | या |
| व | च | नं | भ्रा | तृ | वा | त्स | ल्या |
| द | नु | रू | पं | त | वै | व | तत् |