अन्वयः
त्वन्निमित्तम् for your sake, रक्षोभ्यः on account of rakshasas, तापसान् to ascetics, इदम् this fear, प्रतिवर्तते तावत् is arising, तेन by that, संविग्नाः they are scared, मिथ: mutually, कथाः incidents, कथयन्ति are exchanging.
Summary
There is apprehension for ascetics from the demons on acount of your presence here. That is why they are conversing with one another about the likely fallout.
पदच्छेदः
| त्वन्निमित्तम् | त्वद्–निमित्त (२.१) |
| इदं | इदम् (२.१) |
| तावत् | तावत् (अव्ययः) |
| तापसान् | तापस (२.३) |
| प्रति | प्रति (अव्ययः) |
| वर्तते | वर्तते (√वृत् लट् प्र.पु. एक.) |
| रक्षोभ्यस् | रक्षस् (५.३) |
| तेन | तेन (अव्ययः) |
| संविग्नाः | संविग्न (√सम्-विज् + क्त, १.३) |
| कथयन्ति | कथयन्ति (√कथय् लट् प्र.पु. बहु.) |
| मिथः | मिथस् (अव्ययः) |
| कथाः | कथा (२.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त्व | न्नि | मि | त्त | मि | दं | ता | व |
| त्ता | प | सा | न्प्र | ति | व | र्त | ते |
| र | क्षो | भ्य | स्ते | न | सं | वि | ग्नाः |
| क | थ | य | न्ति | मि | थः | क | थाः |