अन्वयः
अद्य now, ऋषयः sages, दुरात्मभिः by those beings of wicked nature, तैः by those rakshasas, अमृष्टान् infested with, आश्रमान् the hermitages, प्रजिहासवः those who want to flee, अन्यदेशस्य to another region, गमनाय to go, माम् me, चोदयन्ति are urging.
Summary
Now all these sages are urging me to abandon this hermitage infested by these wicked rakshasas and move to another region.
पदच्छेदः
| तैर् | तद् (३.३) |
| दुरात्मभिर् | दुरात्मन् (३.३) |
| आविष्टान् | आविष्ट (√आ-विश् + क्त, २.३) |
| आश्रमान् | आश्रम (२.३) |
| प्रजिहासवः | प्रजिहासु (१.३) |
| गमनायान्यदेशस्य | गमन (४.१)–अन्य–देश (६.१) |
| चोदयन्त्य् | चोदयन्ति (√चोदय् लट् प्र.पु. बहु.) |
| ऋषयो | ऋषि (१.३) |
| ऽद्य | अद्य (अव्ययः) |
| माम् | मद् (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| तै | र्दु | रा | त्म | भि | रा | वि | ष्टा |
| ना | श्र | मा | न्प्र | जि | हा | स | वः |
| ग | म | ना | या | न्य | दे | श | स्य |
| चो | द | य | न्त्यृ | ष | यो | ऽद्य | माम् |