अन्वयः
तत्र there, पुरस्तात् in front of, चित्रकूटस्य of Chitrakuta, तापसाश्रमे in the hermitage, रामम् Rama, आश्रित्य sought his protection, निरताः intent on staying, तान् them, उत्सुकान् anxious, अलक्षयत् observed.
Summary
Rama observed that the sages who earlier sought to stay with him near his hermitage under his protection on chitrakuta were filled with anxiety (now).
पदच्छेदः
| ये | यद् (१.३) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| चित्रकूटस्य | चित्रकूट (६.१) |
| पुरस्तात् | पुरस्तात् (अव्ययः) |
| तापसाश्रमे | तापस–आश्रम (७.१) |
| रामम् | राम (२.१) |
| आश्रित्य | आश्रित्य (√आ-श्रि + ल्यप्) |
| निरतास् | निरत (√नि-रम् + क्त, १.३) |
| तान् | तद् (२.३) |
| अलक्षयद् | अलक्षयत् (√लक्षय् लङ् प्र.पु. एक.) |
| उत्सुकान् | उत्सुक (२.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ये | त | त्र | चि | त्र | कू | ट | स्य |
| पु | र | स्ता | त्ता | प | सा | श्र | मे |
| रा | म | मा | श्रि | त्य | नि | र | ता |
| स्ता | न | ल | क्ष | य | दु | त्सु | कान् |