अन्वयः
शङ्किताः suspicious, नयनैः with eyes, भृकुटीभिश्च by knitting their eyebrows, रामम् of Rama, निर्दिश्य glancing, अन्योन्यम् to each other, उपजल्पन्तः conversing, मिथः mutually, कथाः incidents, चक्रुः narrated.
Summary
Those sages, glancing at Rama with suspicious eyes, knitting their eyebrows and murmering among themselves, conversed secretly.
पदच्छेदः
| नयनैर् | नयन (३.३) |
| भृकुटीभिश् | भृकुटी (३.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| रामं | राम (२.१) |
| निर्दिश्य | निर्दिश्य (√निः-दिश् + ल्यप्) |
| शङ्किताः | शङ्कित (√शङ्क् + क्त, १.३) |
| अन्योन्यम् | अन्योन्य (२.१) |
| उपजल्पन्तः | उपजल्पत् (√उप-जल्प् + शतृ, १.३) |
| शनैश् | शनैस् (अव्ययः) |
| चक्रुर् | चक्रुः (√कृ लिट् प्र.पु. बहु.) |
| मिथः | मिथस् (अव्ययः) |
| कथाः | कथा (२.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| न | य | नै | र्भृ | कु | टी | भि | श्च |
| रा | मं | नि | र्दि | श्य | श | ङ्कि | ताः |
| अ | न्यो | न्य | मु | प | ज | ल्प | न्तः |
| श | नै | श्च | क्रु | र्मि | थः | क | थाः |