अन्वयः
राघव O Rama, नित्यम् always, यत्तस्य since for a man, समर्थस्यापि हि सतः even though capable, सकलत्रस्य a man accompanied by his wife, ते to you, सन्देहः doubtful, अद्य now, इह here, वासः living, दुःखम् is painful.
Summary
O Rama, even though you are always vigilant and capable in all possible ways to defend youself, a doubt arises in our mind. It is perilous for you to live here with your wife.
पदच्छेदः
| सकलत्रस्य | स (अव्ययः)–कलत्र (६.१) |
| संदेहो | संदेह (१.१) |
| नित्यं | नित्यम् (अव्ययः) |
| यत् | यत् (अव्ययः) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| राघव | राघव (८.१) |
| समर्थस्यापि | समर्थ (६.१)–अपि (अव्ययः) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| सतो | सत् (६.१) |
| वासो | वास (१.१) |
| दुःखम् | दुःख (१.१) |
| इहाद्य | इह (अव्ययः)–अद्य (अव्ययः) |
| ते | त्वद् (६.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | क | ल | त्र | स्य | सं | दे | हो |
| नि | त्यं | य | त्त | स्य | रा | घ | व |
| स | म | र्थ | स्या | पि | हि | स | तो |
| वा | सो | दुः | ख | इ | हा | द्य | ते |