पदच्छेदः
| देवकार्यनिमित्तं | देव–कार्य–निमित्त (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| यया | यद् (३.१) |
| संत्वरमाणया | संत्वरमाण (√सम्-त्वर् + शानच्, ३.१) |
| दशरात्रं | दशरात्र (२.१) |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ + क्त्वा) |
| रात्रिः | रात्रि (१.१) |
| सेयं | तद् (१.१)–इदम् (१.१) |
| मातेव | मातृ (१.१)–इव (अव्ययः) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| ऽनघ | अनघ (८.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दे | व | का | र्य | नि | मि | त्तं | च |
| य | या | सं | त्व | र | मा | ण | या |
| द | श | रा | त्रं | कृ | त्वा | रा | त्रिः |
| से | यं | मा | ते | व | ते | ऽन | घ |