पदच्छेदः
| अनसूयेति | अनसूया (१.१)–इति (अव्ययः) |
| या | यद् (१.१) |
| लोके | लोक (७.१) |
| कर्मभिः | कर्मन् (३.३) |
| ख्यातिम् | ख्याति (२.१) |
| आगता | आगत (√आ-गम् + क्त, १.१) |
| तां | तद् (२.१) |
| शीघ्रम् | शीघ्रम् (अव्ययः) |
| अभिगच्छ | अभिगच्छ (√अभि-गम् लोट् म.पु. ) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| अभिगम्यां | अभिगम्य (√अभि-गम् + कृत्, २.१) |
| तपस्विनीम् | तपस्विनी (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | न | सू | ये | ति | या | लो | के |
| क | र्म | भिः | क्या | ति | मा | ग | ता |
| तां | शी | घ्र | म | भि | ग | च्छ | त्व |
| म | भि | ग | म्यां | त | प | स्वि | नीम् |