तद्धनुः प्राप्य मे पित्रा व्याहृतं सत्यवादिना ।
समवाये नरेन्द्राणां पूर्वमामन्त्र्य पार्थिवान् ॥
तद्धनुः प्राप्य मे पित्रा व्याहृतं सत्यवादिना ।
समवाये नरेन्द्राणां पूर्वमामन्त्र्य पार्थिवान् ॥
अन्वयः
सत्यवादिना by a truthful man, मे पित्रा by my father, पूर्वम् previously, पार्थिवान् kings, आमन्त्र्य having invited, नरेन्द्राणाम् of kings, समवाये in the assembly, तत् धनुः that bow, प्राप्य having acquired, व्याहृतम् addressed them.M N Dutt
Having obtained the bow, my truthful father said, 'No fear!' inviting at the same time the kings to an assembly of sovereigns.Summary
My truthful father, after having acquired the bow, invited all the princes and placed the great bow before them in the assembly where he declared:पदच्छेदः
| तद् | तद् (२.१) |
| धनुः | धनुस् (२.१) |
| प्राप्य | प्राप्य (√प्र-आप् + ल्यप्) |
| मे | मद् (६.१) |
| पित्रा | पितृ (३.१) |
| व्याहृतं | व्याहृत (√व्या-हृ + क्त, १.१) |
| सत्यवादिना | सत्य–वादिन् (३.१) |
| समवाये | समवाय (७.१) |
| नरेन्द्राणां | नरेन्द्र (६.३) |
| पूर्वम् | पूर्वम् (अव्ययः) |
| आमन्त्र्य | आमन्त्र्य (√आ-मन्त्रय् + ल्यप्) |
| पार्थिवान् | पार्थिव (२.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | द्ध | नुः | प्रा | प्य | मे | पि | त्रा |
| व्या | हृ | तं | स | त्य | वा | दि | ना |
| स | म | वा | ये | न | रे | न्द्रा | णां |
| पू | र्व | मा | म | न्त्र्य | पा | र्थि | वान् |