पदच्छेदः
| ते | तद् (१.३) |
| राजवचनात् | राजन्–वचन (५.१) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| समवेता | समवेत (√समव-इ + क्त, १.३) |
| महीपतिम् | महीपति (२.१) |
| अपश्यन्तो | अपश्यत् (१.३) |
| ऽब्रुवन् | अब्रुवन् (√ब्रू लङ् प्र.पु. बहु.) |
| को | क (१.१) |
| नु | नु (अव्ययः) |
| राज्ञो | राजन् (६.१) |
| नः | मद् (२.३) |
| प्रतिवेदयेत् | प्रतिवेदयेत् (√प्रति-वेदय् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | रा | ज | व | च | ना | त्त | त्र |
| स | म | वे | ता | म | ही | प | तिम् |
| अ | प | श्य | न्तो | ऽब्रु | व | न्को | नु |
| रा | ज्ञो | नः | प्र | ति | वे | द | येत् |