अन्वयः
पुराणवित् one who is wellversed in history and tradition, सुमन्त्र: Sumantra, इति thus, उक्त्वा having spoken, अन्त:पुरद्वारम् entrance to the inner apartment, आजगाम approached, सदा always, सक्तम् remains closed, तत् that, वेश्म palace, प्रविवेश ह entered.
Summary
Having said so, Sumantra who was versed in history and tradition approached the inner apartment which always remains closed.
पदच्छेदः
| इत्य् | इति (अव्ययः) |
| उक्त्वान्तःपुरद्वारम् | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा)–अन्तःपुर–द्वार (२.१) |
| आजगाम | आजगाम (√आ-गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| पुराणवित् | पुराण–विद् (१.१) |
| आशिर्भिर् | आशिस् (३.३) |
| गुणयुक्ताभिर् | गुण–युक्त (√युज् + क्त, ३.३) |
| अभितुष्टाव | अभितुष्टाव (√अभि-स्तु लिट् प्र.पु. एक.) |
| राघवम् | राघव (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | त्यु | क्त्वा | न्तः | पु | र | द्वा | र |
| मा | ज | गा | म | पु | रा | ण | वित् |
| आ | शी | र्भि | र्गु | ण | यु | क्ता | भि |
| र | भि | तु | ष्टा | व | रा | घ | वम् |