अन्वयः
अहम् I, न च एव संप्रसुप्त: I have not slept, आशु instantly, राघवम् to son of the Raghus (Rama), इह here, आनय bring, इति thus, राजा दशरथ: king Dasaratha, तत्र there, सूतम् to the charioteer, पुन: again, अन्वशात् ordered.
Summary
I did not sleep (last night). Bring Rama here at once, said king Dasaratha to the charioteer again.
पदच्छेदः
| न | न (अव्ययः) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| संप्रसुप्तो | संप्रसुप्त (√संप्र-स्वप् + क्त, १.१) |
| ऽहम् | मद् (१.१) |
| आनयेद् | आनयेत् (√आ-नी विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| आशु | आशु (अव्ययः) |
| राघवम् | राघव (२.१) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| दशरथः | दशरथ (१.१) |
| सूतं | सूत (२.१) |
| तत्रान्वशात् | तत्र (अव्ययः)–अन्वशात् (√अनु-शास् लङ् प्र.पु. एक.) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| न | चै | व | सं | प्र | सु | तो | ऽह |
| मा | न | ये | दा | शु | रा | घ | वम् |
| इ | ति | रा | जा | द | श | र | थः |
| सू | तं | त | त्रा | न्व | शा | त्पु | नः |