अन्वयः
रामप्रियचिकीर्षवः wishing the welfare of Rama, ते सर्वे all of them, समायान्तम् arriving, समीक्ष्य having seen, ससंभ्रमाः in great haste, सहसा quickly, आसनेभ्यः from their seats, उत्पतिताः rose.
M N Dutt
They all seeing Sumantra, ever wishing good to Rāma, approach, rose suddenly up from their seats with due respect.
Summary
On seeing (Sumantra) arriving, all of them, wellwishers to Rama, quickly rose from their seats.
पदच्छेदः
| ते | तद् (१.३) |
| समीक्ष्य | समीक्ष्य (√सम्-ईक्ष् + ल्यप्) |
| समायान्तं | समायान्त् (√समा-या + शतृ, २.१) |
| रामप्रियचिकीर्षवः | राम–प्रिय–चिकीर्षु (१.३) |
| सहभार्याय | सहभार्य (४.१) |
| रामाय | राम (४.१) |
| क्षिप्रम् | क्षिप्रम् (अव्ययः) |
| एवाचचक्षिरे | एव (अव्ययः)–आचचक्षिरे (√आ-चक्ष् लिट् प्र.पु. बहु.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ते | स | मी | क्ष्य | स | मा | या | न्तं |
| रा | म | प्रि | य | चि | की | र्ष | वः |
| स | ह | भा | र्या | य | रा | मा | य |
| क्षि | प्र | मे | वा | च | च | क्षि | रे |