अहं हि वचनाद्राज्ञः पतेयमपि पावके ।
भक्षयेयं विषं तीक्ष्णं मज्जेयमपि चार्णवे ।
नियुक्तो गुरुणा पित्रा नृपेण च हितेन च ॥
अहं हि वचनाद्राज्ञः पतेयमपि पावके ।
भक्षयेयं विषं तीक्ष्णं मज्जेयमपि चार्णवे ।
नियुक्तो गुरुणा पित्रा नृपेण च हितेन च ॥
अन्वयः
देवी O devi, अहो alas, धिक् what a pity, माम् to me, ईदृशम् such, वच: words, वक्तुम् to speak, नार्हसे it does not behove you, हि because, अहम् I, राज्ञ: king's, वचनात् on the word, पावकेऽपि even in fire, पतेयम् will jump, नृपेण by the king, हितेन च who desires my welfare, गुरुणा by the gurus, पित्रा by father, नियुक्त: ordered, तीक्ष्णं विषम् deadly poison, भक्षयेयम् will drink, अपि च and also, अर्णवे in the ocean, मज्जेयम् shall get drowned.Summary
Alas, what a pity, O queen, it does not behove you to speak to me such words. I can jump into fire. Since he is my father, preceptor and wellwisher, I shall consume deadly poison or even get drowned in the sea if he so commands.पदच्छेदः
| अहं | मद् (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| वचनाद् | वचन (५.१) |
| राज्ञः | राजन् (६.१) |
| पतेयम् | पतेयम् (√पत् विधिलिङ् उ.पु. ) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| पावके | पावक (७.१) |
| भक्षयेयं | भक्षयेयम् (√भक्षय् विधिलिङ् उ.पु. ) |
| विषं | विष (२.१) |
| तीक्ष्णं | तीक्ष्ण (२.१) |
| मज्जेयम् | मज्जेयम् (√मज्ज् विधिलिङ् उ.पु. ) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| चार्णवे | च (अव्ययः)–अर्णव (७.१) |
| नियुक्तो | नियुक्त (√नि-युज् + क्त, १.१) |
| गुरुणा | गुरु (३.१) |
| पित्रा | पितृ (३.१) |
| नृपेण | नृप (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| हितेन | हित (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | हं | हि | व | च | ना | द्रा | ज्ञः | प | ते | य | म |
| पि | पा | व | के | भ | क्ष | ये | यं | वि | षं | ती | क्ष्णं |
| म | ज्जे | य | म | पि | चा | र्ण | वे | नि | यु | क्तो | गु |
| रु | णा | पि | त्रा | नृ | पे | ण | च | हि | ते | न | च |