अन्वयः
अनार्या ignoble, कैकेयी Kaikeyi, आर्जवसमायुक्तं devoted to rectitude of conduct, सत्यवादिनम् truthful, तं रामम् addressing that Rama, भृशदारुणम् extremely cruel, वचनम् words, उवाच said.
M N Dutt
Then that wicked Kaikeyi spoke these highly cruel words to Rāma, simple and truthful.
Summary
To Rama who was devoted to truth and to rectitude of conduct the ignobale Kaikeyi said:
पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| आर्जवसमायुक्तम् | आर्जव–समायुक्त (√समा-युज् + क्त, २.१) |
| अनार्या | अनार्य (१.१) |
| सत्यवादिनम् | सत्य–वादिन् (२.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| रामं | राम (२.१) |
| कैकेयी | कैकेयी (१.१) |
| वचनं | वचन (२.१) |
| भृशदारुणम् | भृश–दारुण (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | मा | र्ज | व | स | मा | यु | क्त |
| म | ना | र्या | स | त्य | वा | दि | नम् |
| उ | वा | च | रा | मं | कै | के | यी |
| व | च | नं | भृ | श | दा | रु | णम् |