अहं हि सीतां राज्यं च प्राणानिष्टान्धनानि च ।
हृष्टो भ्रात्रे स्वयं दद्यां भरतायाप्रचोदितः ॥
अहं हि सीतां राज्यं च प्राणानिष्टान्धनानि च ।
हृष्टो भ्रात्रे स्वयं दद्यां भरतायाप्रचोदितः ॥
अन्वयः
अहम् I, अप्रचोदितः unurged, हृष्टः pleased, भ्रात्रे to my brother, भरताय for Bharata, सीताम् Sita, राज्यम् kingdom, प्राणान् life, इष्टान् most coveted, धनानि च wealth also, स्वयम् myself, दद्याम् shall give.M N Dutt
What of the command of the king, my father, I shall even at your mandate joyfully make over to Bharata, my kingdom, Sītā, wealth and even my life, thereby satisfying you, and fulfilling my promise.Summary
Unurged, I would have gladly given to Bharata the kingdom, wealth, my most coveted life, and even Sita.पदच्छेदः
| अहं | मद् (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| सीतां | सीता (२.१) |
| राज्यं | राज्य (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| प्राणान् | प्राण (२.३) |
| इष्टान् | इष्ट (√इष् + क्त, २.३) |
| धनानि | धन (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| हृष्टो | हृष्ट (√हृष् + क्त, १.१) |
| भ्रात्रे | भ्रातृ (४.१) |
| स्वयं | स्वयम् (अव्ययः) |
| दद्यां | दद्याम् (√दा विधिलिङ् उ.पु. ) |
| भरतायाप्रचोदितः | भरत (४.१)–अप्रचोदित (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | हं | हि | सी | तां | रा | ज्यं | च |
| प्रा | णा | नि | ष्टा | न्ध | ना | नि | च |
| हृ | ष्टो | भ्रा | त्रे | स्व | यं | द | द्यां |
| भ | र | ता | या | प्र | चो | दि | तः |