स्थिरं हि नूनं हृदयं ममायसं; न भिद्यते यद्भुवि नावदीर्यते ।
अनेन दुःखेन च देहमर्पितं; ध्रुवं ह्यकाले मरणं न विद्यते ॥
स्थिरं हि नूनं हृदयं ममायसं; न भिद्यते यद्भुवि नावदीर्यते ।
अनेन दुःखेन च देहमर्पितं; ध्रुवं ह्यकाले मरणं न विद्यते ॥
अन्वयः
नूनम् assuredly, मम my, स्थिरम् still (hard), हृदयम् heart, आयसम् is made of iron, यत् since, न भिद्यते is not breaking, भुवि on this earth, नावदीर्यते does not disintegrate, अनेन this, दुःखेन due to sorrow, देहम् body, अर्पितम् surrendered (pervaded), अकाले untimely, मरणम् death, न विद्यते may not be possible, ध्रुवम् this is certain.Summary
Surely my still (hard) heart is made of iron. It neither bursts nor breaks down on the ground. Pervaded by grief, there is no untimely death for this my body, too.पदच्छेदः
| स्थिरं | स्थिर (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| नूनं | नूनम् (अव्ययः) |
| हृदयं | हृदय (१.१) |
| ममायसं | मद् (६.१)–आयस (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| भिद्यते | भिद्यते (√भिद् प्र.पु. एक.) |
| यद् | यत् (अव्ययः) |
| भुवि | भू (७.१) |
| नावदीर्यते | न (अव्ययः)–अवदीर्यते (√अव-दृ प्र.पु. एक.) |
| अनेन | इदम् (३.१) |
| दुःखेन | दुःख (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| देहम् | देह (१.१) |
| अर्पितं | अर्पित (√अर्पय् + क्त, १.१) |
| ध्रुवं | ध्रुव (१.१) |
| ह्य् | हि (अव्ययः) |
| अकाले | अकाल (७.१) |
| मरणं | मरण (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| विद्यते | विद्यते (√विद् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्थि | रं | हि | नू | नं | हृ | द | यं | म | मा | य | सं |
| न | भि | द्य | ते | य | द्भु | वि | ना | व | दी | र्य | ते |
| अ | ने | न | दुः | खे | न | च | दे | ह | म | र्पि | तं |
| ध्रु | वं | ह्य | का | ले | म | र | णं | न | वि | द्य | ते |
| ज | त | ज | र | ||||||||