भृशमसुखममर्षिता तदा; बहु विललाप समीक्ष्य राघवम् ।
व्यसनमुपनिशाम्य सा मह;त्सुतमिव बद्धमवेक्ष्य किंनरी ॥
भृशमसुखममर्षिता तदा; बहु विललाप समीक्ष्य राघवम् ।
व्यसनमुपनिशाम्य सा मह;त्सुतमिव बद्धमवेक्ष्य किंनरी ॥
अन्वयः
सा that (Kausalya), राघवम् Rama, समीक्ष्य having seen, महत् great, व्यसनम् misfortune, उपनिशम्य having heard, बद्धम् is made captive, सुतम् son, अवेक्ष्य looking on, किन्नरीव like a kinnari, तदा then, असुखम् unhappy, अमर्षिता wrathful, भृशम् extremely, बहु much, विललाप lamented.M N Dutt
Kausalyā like a Kinnarī unable to bear this great calamity, anticipating great misfortune and seeing Rāma bound (with a great vow), began to lament in various ways. someSummary
Kausalya, filled with anger due to extreme sorrow reflected over her misfortune, and burst into harrowing tears, looking at Rama, like a kinnari looking at her grownup son taken captive. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे विंशस्सर्गः॥Thus ends the twentieth sarga of Ayodhyakanda of the the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| भृशम् | भृशम् (अव्ययः) |
| असुखम् | असुख (२.१) |
| अमर्षिता | अमर्षित (१.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| बहु | बहु (२.१) |
| विललाप | विललाप (√वि-लप् लिट् प्र.पु. एक.) |
| समीक्ष्य | समीक्ष्य (√सम्-ईक्ष् + ल्यप्) |
| राघवम् | राघव (२.१) |
| व्यसनम् | व्यसन (२.१) |
| उपनिशाम्य | उपनिशाम्य (√उपनि-शामय् + ल्यप्) |
| सा | तद् (१.१) |
| महत् | महत् (२.१) |
| सुतम् | सुत (२.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| बद्धम् | बद्ध (√बन्ध् + क्त, २.१) |
| अवेक्ष्य | अवेक्ष्य (√अव-ईक्ष् + ल्यप्) |
| किंनरी | किंनरी (१.१) |
छन्दः
अपरवक्त्रछन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भृ | श | म | सु | ख | म | म | र्षि | ता | त | दा | |
| ब | हु | वि | ल | ला | प | स | मी | क्ष्य | रा | घ | वम् |
| व्य | स | न | मु | प | नि | शा | म्य | सा | म | ह | |
| त्सु | त | मि | व | ब | द्ध | म | वे | क्ष्य | किं | न | री |