यशो ह्यहं केवलराज्यकारणा;न्न पृष्ठतः कर्तुमलं महोदयम् ।
अदीर्घकाले न तु देवि जीविते; वृणेऽवरामद्य महीमधर्मतः ॥
यशो ह्यहं केवलराज्यकारणा;न्न पृष्ठतः कर्तुमलं महोदयम् ।
अदीर्घकाले न तु देवि जीविते; वृणेऽवरामद्य महीमधर्मतः ॥
अन्वयः
केवलराज्यकारणात् only for the sake of the kingdom, अहम् I, महोदयम् great, यशः glory, पृष्ठतः कर्तुम् to push it back, न अलम् must not, देवि O Mother, अदीर्घकाले in a short duration, जीविते in life, अद्य now, अवराम् insignificant, महीम् earth, अधर्मतः unrighteously, न वृणे will not choose.M N Dutt
I cannot neglect eminent fame being impelled by avarice for kingdom alone. Life is but of short duration, Oh worshipful one, and as such I do not long for acquiring this nether earth by means unrighteous.Summary
I will not forsake this great glory (of fulfilling my father's promise) for the sake of the kingdom. In this transient existence O mother, I do not wish to acquire this insignificant earth unrighteously.पदच्छेदः
| यशो | यशस् (२.१) |
| ह्य् | हि (अव्ययः) |
| अहं | मद् (१.१) |
| केवलराज्यकारणान् | केवल–राज्य–कारण (५.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| पृष्ठतः | पृष्ठतस् (अव्ययः) |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ + तुमुन्) |
| अलं | अलम् (अव्ययः) |
| महोदयम् | महत्–उदय (२.१) |
| अदीर्घकाले | अदीर्घ–काल (७.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| देवि | देवी (८.१) |
| जीविते | जीवित (७.१) |
| वृणे | वृणे (√वृ लट् उ.पु. ) |
| ऽवराम् | अवर (२.१) |
| अद्य | अद्य (अव्ययः) |
| महीम् | मही (२.१) |
| अधर्मतः | अधर्म (५.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | शो | ह्य | हं | के | व | ल | रा | ज्य | का | र | णा |
| न्न | पृ | ष्ठ | तः | क | र्तु | म | लं | म | हो | द | यम् |
| अ | दी | र्घ | का | ले | न | तु | दे | वि | जी | वि | ते |
| वृ | णे | ऽव | रा | म | द्य | म | ही | म | ध | र्म | तः |
| ज | त | ज | र | ||||||||