अन्वयः
अथ thereafter, आत्मवान् selfpossessed, सः रामः that Rama, धैर्येण with fortitude, सत्त्वम् composure, धारयन् holding, व्यथया with mental agony, दीनम् miserable, सविशेषम् especially, अमर्षितम् indignant, नागेन्द्रमिव like a king cobra, श्वसन्तम् hissing, रोषविस्फारितेक्षणम् eyes widened with wrath, सुहृदम् to the intimate, प्रियं भ्रातरम् beloved brother, सौमित्रिम् to Lakshmana, आसाद्य having approached, इदम् these words, उवाच said.
Summary
The selfpossessed Rama held his composure and approached his beloved, intimate brother Lakshmana who was (looking) miserable with his mental agony. To him, who was hissing like a king cobra, he said:
पदच्छेदः
| अथ | अथ (अव्ययः) |
| तं | तद् (२.१) |
| व्यथया | व्यथा (३.१) |
| दीनं | दीन (२.१) |
| सविशेषम् | स (अव्ययः)–विशेष (२.१) |
| अमर्षितम् | अमर्षित (२.१) |
| श्वसन्तम् | श्वसत् (√श्वस् + शतृ, २.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| नागेन्द्रं | नाग–इन्द्र (२.१) |
| रोषविस्फारितेक्षणम् | रोष–विस्फारित (√वि-स्फारय् + क्त)–ईक्षण (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | थ | तं | व्य | थ | या | दी | नं |
| स | वि | शे | ष | म | म | र्षि | तम् |
| श्व | स | न्त | मि | व | ना | गे | न्द्रं |
| रो | ष | वि | स्फा | रि | ते | क्ष | णम् |