बुद्धिः प्रणीता येनेयं मनश्च सुसमाहितम् ।
तत्तु नार्हामि संक्लेष्टुं प्रव्रजिष्यामि माचिरम् ॥
बुद्धिः प्रणीता येनेयं मनश्च सुसमाहितम् ।
तत्तु नार्हामि संक्लेष्टुं प्रव्रजिष्यामि माचिरम् ॥
अन्वयः
येन since, इयम् this, बुद्धि: intellect, प्रणीता is advanced, मनश्च mind also, सुसमाहितम् is wellcomposed, तम् him, संक्लेष्टुम् to inflict pain, नार्हामि I do not deserve, प्रव्रजिष्यामि I shall depart, चिरम् delay, मा not.M N Dutt
That great One, who' has inspired Kaikeyi with this mode of mind and has kept it firm, I cannot offend. I shall repair hence without any delay.Summary
With wellcomposed mind this decision has been taken. I do not like to inflict pain (on Dasaratha or Kaikeyi). I shall, therefore, depart to the forest without delay.पदच्छेदः
| बुद्धिः | बुद्धि (१.१) |
| प्रणीता | प्रणीत (√प्र-नी + क्त, १.१) |
| येनेयं | यद् (३.१)–इदम् (१.१) |
| मनश् | मनस् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| सुसमाहितम् | सु (अव्ययः)–समाहित (१.१) |
| तत् | तद् (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| नार्हामि | न (अव्ययः)–अर्हामि (√अर्ह् लट् उ.पु. ) |
| संक्लेष्टुं | संक्लेष्टुम् (√सम्-क्लिश् + तुमुन्) |
| प्रव्रजिष्यामि | प्रव्रजिष्यामि (√प्र-व्रज् लृट् उ.पु. ) |
| माचिरम् | माचिरम् (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बु | द्धिः | प्र | णी | ता | ये | ने | यं |
| म | न | श्च | सु | स | मा | हि | तम् |
| त | त्तु | ना | र्हा | मि | सं | क्ले | ष्टुं |
| प्र | व्र | जि | ष्या | मि | मा | चि | रम् |