एवमुक्ता तु रामेण बाष्पपर्याकुलेक्षणा ।
कौसल्या पुत्रशोकार्ता रामं वचनमब्रवीत् ।
गच्छ पुत्र त्वमेकाग्रो भद्रं तेऽस्तु सदा विभो ॥
एवमुक्ता तु रामेण बाष्पपर्याकुलेक्षणा ।
कौसल्या पुत्रशोकार्ता रामं वचनमब्रवीत् ।
गच्छ पुत्र त्वमेकाग्रो भद्रं तेऽस्तु सदा विभो ॥
अन्वयः
रामेण by Rama, एवम् in this manner, उक्ता having been said, कौशल्या Kausalya, पुत्रशोकार्ता distressed with grief for her son, बाष्पपर्याकुलेक्षणा with her eyes filled with tears, रामम् to Rama, वचनम् these words, अब्रवीत् said.M N Dutt
Being thus accosted by Rāma, Kausalyā being distressed with the thought of separation from her son, spoke to him with tears in her eyes the following words.Summary
To these words of Rama, Kausalya, distressed with grief for her son, replied with her eyes filled with tears:पदच्छेदः
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| उक्ता | उक्त (√वच् + क्त, १.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| रामेण | राम (३.१) |
| बाष्पपर्याकुलेक्षणा | बाष्प–पर्याकुल–ईक्षण (१.१) |
| कौसल्या | कौसल्या (१.१) |
| पुत्रशोकार्ता | पुत्र–शोक–आर्त (१.१) |
| रामं | राम (२.१) |
| वचनम् | वचन (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| गच्छ | गच्छ (√गम् लोट् म.पु. ) |
| पुत्र | पुत्र (८.१) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| एकाग्रो | एकाग्र (१.१) |
| भद्रं | भद्र (१.१) |
| ते | त्वद् (४.१) |
| ऽस्तु | अस्तु (√अस् लोट् प्र.पु. एक.) |
| सदा | सदा (अव्ययः) |
| विभो | विभु (८.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | व | मु | क्ता | तु | रा | मे | ण | बा | ष्प | प | र्या |
| कु | ले | क्ष | णा | कौ | स | ल्या | पु | त्र | शो | का | र्ता |
| रा | मं | व | च | न | म | ब्र | वीत् | ग | च्छ | पु | त्र |
| त्व | मे | का | ग्रो | भ | द्रं | ते | ऽस्तु | स | दा | वि | भो |