वनं तु नेतुं न कृता मतिस्तदा; बभूव रामेण यदा महात्मना ।
न तस्य सीता वचनं चकार त;त्ततोऽब्रवीद्राममिदं सुदुःखिता ॥
वनं तु नेतुं न कृता मतिस्तदा; बभूव रामेण यदा महात्मना ।
न तस्य सीता वचनं चकार त;त्ततोऽब्रवीद्राममिदं सुदुःखिता ॥
अन्वयः
महात्मना by the great, रामेण by Rama, यदा when, वनम् to the forest, नेतुम् to take, मतिः mind (decision), कृता has been made, न बभूव did not happen, तदा then, सीता Sita, तस्य his, तत् that, वचनं words, न चकार did not follow, ततः threafter, सुदुःखिता deeply grieved, रामम् to Rama, इदम् these words, अब्रवीत् said.M N Dutt
While the high-souled Rāma, resolved thus not to take Sītā with him to the forest, she, greatly sorry, did not accept his words and spoke to him in the following way.Summary
When the great Rama decided not to take her along with him to the forest, Sita, deeply grieved said these words.इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे अष्टाविंशस्सर्गः॥Thus ends the twentyeighth sarga of Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| वनं | वन (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| नेतुं | नेतुम् (√नी + तुमुन्) |
| न | न (अव्ययः) |
| कृता | कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| मतिस् | मति (१.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| बभूव | बभूव (√भू लिट् प्र.पु. एक.) |
| रामेण | राम (३.१) |
| यदा | यदा (अव्ययः) |
| महात्मना | महात्मन् (३.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| सीता | सीता (१.१) |
| वचनं | वचन (२.१) |
| चकार | चकार (√कृ लिट् प्र.पु. एक.) |
| तत् | तद् (२.१) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ऽब्रवीद् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| रामम् | राम (२.१) |
| इदं | इदम् (२.१) |
| सुदुःखिता | सु (अव्ययः)–दुःखित (१.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | नं | तु | ने | तुं | न | कृ | ता | म | ति | स्त | दा |
| ब | भू | व | रा | मे | ण | य | दा | म | हा | त्म | ना |
| न | त | स्य | सी | ता | व | च | नं | च | का | र | त |
| त्त | तो | ऽब्र | वी | द्रा | म | मि | दं | सु | दुः | खि | ता |
| ज | त | ज | र | ||||||||