अन्वयः
महाबल O mighty one, अहम् I, पुरा long ago, लक्षणिभ्यः from palmist, द्विजातिभ्यः from brahmins, वचनम् words, शृत्वा having heard, नित्यमेव always, वनवासकृतोत्साहा I have become eager to dwell in the forest.
M N Dutt
I have heard this from the Brāhmaṇas versed in palmistry, and I have all along been anxious.
Summary
O mighty hero ever since I heard the prophesies from the brahmin palmists I am yearning to dwell in the forest.
पदच्छेदः
| लक्षणिभ्यो | लक्षणिन् (५.३) |
| द्विजातिभ्यः | द्विजाति (५.३) |
| श्रुत्वाहं | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा)–मद् (१.१) |
| वचनं | वचन (२.१) |
| गृहे | गृह (७.१) |
| वनवासकृतोत्साहा | वन–वास–कृत (√कृ + क्त)–उत्साह (१.१) |
| नित्यम् | नित्यम् (अव्ययः) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| महाबल | महत्–बल (८.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ल | क्ष | णि | भ्यो | द्वि | जा | ति | भ्यः |
| श्रु | त्वा | हं | व | च | नं | गृ | हे |
| व | न | वा | स | कृ | तो | त्सा | हा |
| नि | त्य | मे | व | म | हा | ब | ल |