स मां पिता यथा शास्ति सत्यधर्मपथे स्थितः ।
तथा वर्तितुमिच्छामि स हि धर्मः सनातनः ।
अनुगच्छस्व मां भीरु सहधर्मचरी भव ॥
स मां पिता यथा शास्ति सत्यधर्मपथे स्थितः ।
तथा वर्तितुमिच्छामि स हि धर्मः सनातनः ।
अनुगच्छस्व मां भीरु सहधर्मचरी भव ॥
अन्वयः
सत्यधर्मपथे On the path of truth and dharma, स्थितः firmly fixed, सः पिता such father, माम् me, यथा as, शास्ति commands, तथा accordingly, वर्तितुम् to abide by, इच्छामि wish सः that one, सनातनः eternal, धर्मः हि is truth indeed.M N Dutt
Therefore do I desire to follow what my father commands me, treading in the path of truth, and this is the virtue eternal.Summary
My father who follows the path of truth and dharma whatever be his commands, I wish to obey. He is, indeed, dharma eternal.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| मां | मद् (२.१) |
| पिता | पितृ (१.१) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| शास्ति | शास्ति (√शास् लट् प्र.पु. एक.) |
| सत्यधर्मपथे | सत्य–धर्म–पथ (७.१) |
| स्थितः | स्थित (√स्था + क्त, १.१) |
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| वर्तितुम् | वर्तितुम् (√वृत् + तुमुन्) |
| इच्छामि | इच्छामि (√इष् लट् उ.पु. ) |
| स | तद् (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| धर्मः | धर्म (१.१) |
| सनातनः | सनातन (१.१) |
| अनुगच्छस्व | अनुगच्छस्व (√अनु-गम् लोट् म.पु. ) |
| मां | मद् (२.१) |
| भीरु | भीरु (२.१) |
| सहधर्मचरी | सहधर्मचर (१.१) |
| भव | भव (√भू लोट् म.पु. ) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | मां | पि | ता | य | था | शा | स्ति | स | त्य | ध | र्म |
| प | थे | स्थि | तः | त | था | व | र्ति | तु | मि | च्छा | मि |
| स | हि | ध | र्मः | स | ना | त | नः | अ | नु | ग | च्छ |
| स्व | मां | भी | रु | स | ह | ध | र्म | च | री | भ | व |