अन्वयः
वीर O heroic one, भरतः Bharata, तव your, तेजसैव with your power, प्रयतः in humble manner, कौसल्यां च Kausalya and, सुमित्रा च also Sumitra, पूजयिष्यति he will honour, अत्र here, संशयः doubt, न not.
Summary
Aware of your power O valiant one, Bharata will undoubtedly pay respect to Kausalya and Sumitra with all humility.
पदच्छेदः
| तवैव | त्वद् (६.१)–एव (अव्ययः) |
| तेजसा | तेजस् (३.१) |
| वीर | वीर (८.१) |
| भरतः | भरत (१.१) |
| पूजयिष्यति | पूजयिष्यति (√पूजय् लृट् प्र.पु. एक.) |
| कौसल्यां | कौसल्या (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| सुमित्रां | सुमित्रा (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| प्रयतो | प्रयत (√प्र-यम् + क्त, १.१) |
| नात्र | न (अव्ययः)–अत्र (अव्ययः) |
| संशयः | संशय (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | वै | व | ते | ज | सा | वी | र |
| भ | र | तः | पू | ज | यि | ष्य | ति |
| कौ | स | ल्यां | च | सु | मि | त्रां | च |
| प्र | य | तो | ना | त्र | सं | श | यः |