तमुवाच ततो रामः परिहाससमन्वितम् ।
गवां सहस्रमप्येकं न तु विश्राणितं मया ।
परिक्षिपसि दण्डेन यावत्तावदवाप्स्यसि ॥
तमुवाच ततो रामः परिहाससमन्वितम् ।
गवां सहस्रमप्येकं न तु विश्राणितं मया ।
परिक्षिपसि दण्डेन यावत्तावदवाप्स्यसि ॥
अन्वयः
ततः then, रामः Rama, परिहाससमन्वितम् jokingly, तम् him, उवाच said, मया by me, एकम् one, गवां सहस्रमपि thousand cows, न च विश्राणितम् not yet given away, दण्डेन with staff, यावत् as far as, परिक्षिपसि you will hurl, तावत् till such place, अवाप्स्यसि you will obtain.Summary
Rama jokingly replied to him, I have not yet gifted one thousand cows. Throw your staff and the cows on the space your staff covers will be yours.पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| रामः | राम (१.१) |
| परिहाससमन्वितम् | परिहास–समन्वित (२.१) |
| गवां | गो (६.३) |
| सहस्रम् | सहस्र (१.१) |
| अप्य् | अपि (अव्ययः) |
| एकं | एक (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| विश्राणितं | विश्राणित (१.१) |
| मया | मद् (३.१) |
| परिक्षिपसि | परिक्षिपसि (√परि-क्षिप् लट् म.पु. ) |
| दण्डेन | दण्ड (३.१) |
| यावत् | यावत् (अव्ययः) |
| तावद् | तावत् (अव्ययः) |
| अवाप्स्यसि | अवाप्स्यसि (√अव-आप् लृट् म.पु. ) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | मु | वा | च | त | तो | रा | मः | प | रि | हा | स |
| स | म | न्वि | तम् | ग | वां | स | ह | स्र | म | प्ये | कं |
| न | तु | वि | श्रा | णि | तं | म | या | प | रि | क्षि | प |
| सि | द | ण्डे | न | या | व | त्ता | व | द | वा | प्स्य | सि |