ततः सभार्यस्त्रिजटो महामुनि;र्गवामनीकं प्रतिगृह्य मोदितः ।
यशोबलप्रीतिसुखोपबृंहिणी;स्तदाशिषः प्रत्यवदन्महात्मनः ॥
ततः सभार्यस्त्रिजटो महामुनि;र्गवामनीकं प्रतिगृह्य मोदितः ।
यशोबलप्रीतिसुखोपबृंहिणी;स्तदाशिषः प्रत्यवदन्महात्मनः ॥
अन्वयः
ततः thereafter, सभार्यः along with his wife, महामुनिः great sage, त्रिजटः Trijata, गवाम् cows, अनीकम् multitude, प्रतिगृह्य having accepted, मोदितः delighted, तदा then, महात्मनः magnanimous (Rama), यशोबलप्रीतिसुखोपबृंहणीः enhancing glory, power, pleasure and prosperity, आशिषः blessings, प्रत्यवदत् gave in reply.Summary
Thereafter that great sage Trijata along with his wife, immensely happy to receive multitudes of cows, pronounced blessings on the magnanimous Rama for glory, power, pleasure and prosperity.पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| सभार्यस् | स (अव्ययः)–भार्या (१.१) |
| त्रिजटो | त्रिजट (१.१) |
| महामुनिर् | महत्–मुनि (१.१) |
| गवाम् | गो (६.३) |
| अनीकं | अनीक (२.१) |
| प्रतिगृह्य | प्रतिगृह्य (√प्रति-ग्रह् + ल्यप्) |
| मोदितः | मोदित (√मोदय् + क्त, १.१) |
| यशोबलप्रीतिसुखोपबृंहिणीस् | यशस्–बल–प्रीति–सुख–उपबृंहिन् (२.३) |
| तद् | तद् (२.१) |
| आशिषः | आशिस् (२.३) |
| प्रत्यवदन् | प्रत्यवदत् (√प्रति-वद् लङ् प्र.पु. एक.) |
| महात्मनः | महात्मन् (६.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | स | भा | र्य | स्त्रि | ज | टो | म | हा | मु | नि |
| र्ग | वा | म | नी | कं | प्र | ति | गृ | ह्य | मो | दि | तः |
| य | शो | ब | ल | प्री | ति | सु | खो | प | बृं | हि | णी |
| स्त | दा | शि | षः | प्र | त्य | व | द | न्म | हा | त्म | नः |
| ज | त | ज | र | ||||||||