अन्वयः
त्वम् you, कामतः admittedly, प्रकृत्यैव by nature itself, विनीतः gentle one, गुणवान् असि are virtuous, पुत्र O son, गुणवत्यपि तु (in you) even though possessed of virtues, स्नेहात् out of affection, ते you, हितम् good, वक्ष्यामि I shall speak.
Summary
Admittedly gentle by nature, you are gifted with virtues. O son, even though virtuous, I shall offer you counsel for your good out of affection for you.
पदच्छेदः
| कामतस् | कामतस् (अव्ययः) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| प्रकृत्यैव | प्रकृति (३.१)–एव (अव्ययः) |
| विनीतो | विनीत (√वि-नी + क्त, १.१) |
| गुणवान् | गुणवत् (१.१) |
| असि | असि (√अस् लट् म.पु. ) |
| गुणवत्य् | गुणवत् (७.१) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| स्नेहात् | स्नेह (५.१) |
| पुत्र | पुत्र (८.१) |
| वक्ष्यामि | वक्ष्यामि (√वच् लृट् उ.पु. ) |
| ते | त्वद् (४.१) |
| हितम् | हित (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| का | म | त | स्त्वं | प्र | कृ | त्यै | व |
| वि | नी | तो | गु | ण | वा | न | सि |
| गु | ण | व | त्य | पि | तु | स्ने | हा |
| त्पु | त्र | व | क्ष्या | मि | ते | हि | तम् |