अन्वयः
भूयः still, विनयम् modesty, आस्थाय resorting to, नित्यम् always, जितेन्द्रिय: conquering the senses, भव become, कामक्रोधसमुत्थानि arising out of lust and anger, व्यसनानि च त्यजेथाः you should also abjure violations.
Summary
With humility, always keep your senses under control. Keep off all violations arising out of lust and anger.
पदच्छेदः
| भूयो | भूयस् (अव्ययः) |
| विनयम् | विनय (२.१) |
| आस्थाय | आस्थाय (√आ-स्था + ल्यप्) |
| भव | भव (√भू लोट् म.पु. ) |
| नित्यं | नित्यम् (अव्ययः) |
| जितेन्द्रियः | जित (√जि + क्त, १.१)–इन्द्रिय (१.१) |
| कामक्रोधसमुत्थानि | काम–क्रोध–समुत्थ (२.३) |
| त्यजेथा | त्यजेथाः (√त्यज् विधिलिङ् म.पु. ) |
| व्यसनानि | व्यसन (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| भू | यो | वि | न | य | मा | स्था | य |
| भ | व | नि | त्यं | जि | ते | न्द्रि | यः |
| का | म | क्रो | ध | स | मु | त्था | नि |
| त्य | जे | था | व्य | स | ना | नि | च |