निर्गुणस्यापि पुत्रस्या काथं स्याद्विप्रवासनम् ।
किं पुनर्यस्य लोकोऽयं जितो वृत्तेन केवलम् ॥
निर्गुणस्यापि पुत्रस्या काथं स्याद्विप्रवासनम् ।
किं पुनर्यस्य लोकोऽयं जितो वृत्तेन केवलम् ॥
अन्वयः
निर्गुणस्यापि even one bereft of virtues, पुत्रस्य of a son, विप्रवासनम् banishment, कथम् how, स्यात् can it be, यस्य whose, वृत्तेन केवलम् by good conduct alone, अयं लोकः this world, जितः conquered, किं पुनः why to say again?Summary
Even a son who is bereft of virtues cannot be banished, what to say about Rama, who by good conduct alone has conquered the world.पदच्छेदः
| निर्गुणस्यापि | निर्गुण (६.१)–अपि (अव्ययः) |
| पुत्रस्य | पुत्र (६.१) |
| कथं | कथम् (अव्ययः) |
| स्याद् | स्यात् (√अस् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| विप्रवासनम् | विप्रवासन (१.१) |
| किं | क (१.१) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| यस्य | यद् (६.१) |
| लोको | लोक (१.१) |
| ऽयं | इदम् (१.१) |
| जितो | जित (√जि + क्त, १.१) |
| वृत्तेन | वृत्त (३.१) |
| केवलम् | केवलम् (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | र्गु | ण | स्या | पि | पु | त्र | स्या |
| का | थं | स्या | द्वि | प्र | वा | स | नम् |
| किं | पु | न | र्य | स्य | लो | को | ऽयं |
| जि | तो | वृ | त्ते | न | के | व | लम् |