अन्वयः
ततः then, श्रीमान् prosperous, जनः people, प्रासादहर्म्याणि palaces and mansions, विमानशिखराणि च terraces of sevenstoried buildings, अधिरुह्य having climbed, उदासीनः sad, व्यलोकयत् looked.
Summary
The rich climbed their palaces and mansions, terraces of sevenstoried buildings and watched them sadly.
पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| प्रासादहर्म्याणि | प्रासाद–हर्म्य (२.३) |
| विमानशिखराणि | विमान–शिखर (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| अधिरुह्य | अधिरुह्य (√अधि-रुह् + ल्यप्) |
| जनः | जन (१.१) |
| श्रीमान् | श्रीमत् (१.१) |
| उदासीनो | उदासीन (√उत्-आस् + क्त, १.१) |
| व्यलोकयत् | व्यलोकयत् (√वि-लोकय् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तः | प्रा | सा | द | ह | र्म्या | णि |
| वि | मा | न | शि | ख | रा | णि | च |
| अ | धि | रु | ह्य | ज | नः | श्री | मा |
| नु | दा | सी | नो | व्य | लो | क | यत् |