अन्वयः
सन्तापकलुषेन्द्रिय: senses overwhelmed with grief, सः सूतः that charioteer (Sumantra), रामप्रेषितः sent forth by Rama, क्षिप्रम् quickly, प्रविश्य having entered, निःश्वसन्तम् sighing, नृपतिम् to king Dasaratha, ददर्श saw.
Summary
At the command of Rama, charioteer Sumantra whose senses were overwhelmed with grief quickly entered the apartment of the king and found him heaving sighs.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| रामप्रेषितः | राम–प्रेषित (√प्र-इषय् + क्त, १.१) |
| क्षिप्रं | क्षिप्रम् (अव्ययः) |
| संतापकलुषेन्द्रियः | संताप–कलुष–इन्द्रिय (१.१) |
| प्रविश्य | प्रविश्य (√प्र-विश् + ल्यप्) |
| नृपतिं | नृपति (२.१) |
| सूतो | सूत (१.१) |
| निःश्वसन्तं | निःश्वसत् (√निः-श्वस् + शतृ, २.१) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | रा | म | प्रे | षि | तः | क्षि | प्रं |
| सं | ता | प | क | लु | षे | न्द्रि | यः |
| प्र | वि | श्य | नृ | प | तिं | सू | तो |
| निः | श्व | स | न्तं | द | द | र्श | ह |